♦ हरिशंकर परसाई > मेरे दोस्त के आंगन में इस साल बैंगन फल आये हैं. पिछले कई सालों से सपाट पड़े आंगन में जब बैंगन का फल उठा तो ऐसी खुशी हुई जैसे बांझ को ढलती उम्र में बच्चा हो…
♦ हरिशंकर परसाई > मेरे दोस्त के आंगन में इस साल बैंगन फल आये हैं. पिछले कई सालों से सपाट पड़े आंगन में जब बैंगन का फल उठा तो ऐसी खुशी हुई जैसे बांझ को ढलती उम्र में बच्चा हो…