दूर कहीं से पास स्वामी संवित् सोमगिरि शिवार्चन प्रकाशन मूल्य – 125/- तेईस वर्षों तक अर्बुदांचल की तपोभूमि में वेदांत अध्ययन एवं धर्मसाधना के अपने अनुभव को स्वामी संवित् सोमगिरि ने काव्यात्मक रूप दिया है. संग्रह की कविताएं जिज्ञासु साधक…
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जनवरी 2012
स्वर्गीय श्रीगोपाल नेवटिया ने जनवरी 1952 में हिंदी का यह डाइजेस्ट देश को समर्पित किया था. उन्होंने पत्रिका के पहले सम्पादकीय में लिखा था- “नवनीत ज्ञान-विज्ञान और उनके सत्साहित्य की चुनी हुई जलधाराओं के अंशों को अपने घट में भरेगा……