♦ नारायण दत्त > अभावों और असुविधाओं से जूझते हुए अपने व्यक्तित्व को अपने हाथों गढ़ना और जीवन-पथ पर अविचल भाव से आगे बढ़ते जाना आदमी के आत्मबल को सूचित करता है. मेरे मित्रों और सहकर्मियों में श्री गिरिजाशंकर…
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पिता ने अहिंसा का साक्षात पाठ पढ़ाया
बड़ों का बचपन ♦ महात्मा गांधी > मेरे एक रिश्तेदार के साथ मुझे बीड़ी-सिगरेट पीने का चस्का लगा. हमारे पास पैसे तो होते नहीं थे. हम दोनों में से किसी को यह पता नहीं था कि सिगरेट पीने से कोई फायदा…