♦ शरद जोशी > श्रे ष्ठ का विशेषण तो दूर, मुझे अपने लिखे पर व्यंग का विशेषण लगाते भी अच्छा नहीं लगता. यह एक खुशफहमी भी हो सकती है कि मेरी रचनाएं व्यंग हैं. दरअसल मेरी कोई पंद्रह बीस रचनाएं…
♦ शरद जोशी > श्रे ष्ठ का विशेषण तो दूर, मुझे अपने लिखे पर व्यंग का विशेषण लगाते भी अच्छा नहीं लगता. यह एक खुशफहमी भी हो सकती है कि मेरी रचनाएं व्यंग हैं. दरअसल मेरी कोई पंद्रह बीस रचनाएं…