♦ रांगेय राघव > पिया चली फगनौटी कैसी गंध उमंग भरी ढफ पर बजते नये बोल, ज्यों मचकीं नयी फरी। चंदा की रुपहली ज्योति है रस से भींग गयी कोयल की मदभरी तान है टीसें सींच गयी। दूर-दूर…
♦ रांगेय राघव > पिया चली फगनौटी कैसी गंध उमंग भरी ढफ पर बजते नये बोल, ज्यों मचकीं नयी फरी। चंदा की रुपहली ज्योति है रस से भींग गयी कोयल की मदभरी तान है टीसें सींच गयी। दूर-दूर…