♦ लक्ष्मेंद्र चोपड़ा > परम श्रद्धेय आदरणीय भाई साहब तथा मेरी जात-बिरादरी के लोगों (अगली पंक्ति से कोटों की फरफराहट) मैं भाई साब के साथ तब से हूं जब ये हमारे कस्बे के टपरा महाविद्यालय के मालिक थे और मैं…
♦ लक्ष्मेंद्र चोपड़ा > परम श्रद्धेय आदरणीय भाई साहब तथा मेरी जात-बिरादरी के लोगों (अगली पंक्ति से कोटों की फरफराहट) मैं भाई साब के साथ तब से हूं जब ये हमारे कस्बे के टपरा महाविद्यालय के मालिक थे और मैं…