Category: विधाएँ

स्मृतिचित्र

♦   डॉ. भगवतशरण उपाध्याय     घटनाएं पुरानी हैं, प्रायः सत्ताईस साल पुरानी. घटीं वे पटना और बक्सर में. जब सन 1943 के सितम्बर में सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे पत्नी को लेकर लखनऊ से पटने के लिए चला, तब…

सार्थकता

♦   वचनेश त्रिपाठी          नदी में हाथी की लाश बही जा रही थी. नदी तीव्र वेग से महासागर की ओर बढ़ी जा रही थी.     एक कौवे ने लाश को देखा, तो प्रसन्न हो उठा, तुरंत उस…

सपने में देखा

 ♦  रबी आरोन लीब       उस रात सपने में मैं स्वर्ग के फाटक पर खड़ा था. तभी एक धर्माचार्य आया और स्वर्ग के द्वाररक्षक फरिश्ते से बोला- ‘मुझे स्वर्ग में प्रवेश मिलना चाहिए. मैं दिन-रात धर्मग्रंथों का स्वाध्याय…

रोशनियां और रात

♦   सुखबीर       यह सातवां या आठवां स्केच है, जो मैं अभी-अभी बनाकर हटा हूं. पर वह बात, जो मैं कहना चाहता हूं, इसमें कही नहीं जा सकी है. रेखाएं हैं, कोण हैं, गोलाइयां हैं, और प्रभाववादी ढंग से…

जीवन के पन्नों पर

  एक पंडित थे, बड़े स्वाध्यायी. शास्त्रार्थ करने के लिए उन्होंने कई ग्रंथों से सामग्री उतार ली, और शास्त्रार्थों में उनकी धाक जम गयी. ऐसे ही एक दिन उन्हें कुछ चोरों ने मार्ग में घेर लिया.     पंडितजी ने पास जितनी…